सोमवार, 11 अगस्त 2025

Poem: " Fun with Math's"

 " Fun with Math's"
 the given figure is Triangle,
we need to find area and angle.
Hypotonus is the longest side of Triangle, 
the given is 90-degree angle.
sum of side is four perimeters,
one by two, base * height is Formula,
for area of Triangle.
the given figure is of 3 sides and 3 angle, 
Pizza is shape of Triangle. 
 the given figure is Triangle,
we need to find area and angle.
Poet: Pankaj Kumar, class: 10th,
Apna Ghar. 

कविता: " मजे में थी जिन्दगी "

 " मजे में थी जिन्दगी  "
कभी - कभी सोचता हूँ सब खत्म हो गए। 
ये खुशी की पहाड़ कही गम हो गए। 
इतनी फुरसत नहीं है अब अपने आप को, 
जो देख सके बीते हुए सपने को। 
वो मस्त बचपन खेल रहा था आँगन में, 
क्या कभी लौट पाएगा वो समय बचपन में ? 
जब बेफिक्र होकर घूमता था। 
इस परेशानियों से दूर ,
जिन्दगी अपनी जीता था। 
तब दुख नहीं था कुछ खोने का ,
अब दुख है कुछ पाने का। 
कभी - कभी सोचता हूँ सब खत्म हो गए। 
ये खुशी की पहाड़ कही गम हो गए। 
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
अपना घर। 

रविवार, 10 अगस्त 2025

कवित: " गर्मी का आक्रमण "

 कवित: " गर्मी का आक्रमण "
पोछ  पोछ पसीना, 
हय! मई तो बेदम हुआ । 
सिर पर तारे मांडाराते  सार,
हय! मई तो चकरा गया । 
क्या बताऊ यार मेरे मई,
मई तो इस गर्मी से बौखाला गया । 
लगे जैसे सिर पर गोला आग का,
नजर मारते ही तुरंत,
हय! मेरे दिमाग की बत्ती बूज गया, 
आई बिजली भी न जाने क्यों ?
तुरंत ही चली गई । 
इस गर्मी से क्या बतलाऊ भाई मेरे, 
पसीना से मई लत पैट हुआ...... ।
कवि: पिंटू कुमार, कक्षा: 10th, 
अपना घर ।  

कविता: " भाई - बहन का त्योहार "

 " भाई - बहन का त्योहार " 
मेरी प्यारी लाडली बहाना , 
तेरी राखी लगे जैसे कोई गहना । 
सारा प्यार एक धागो में बांधा ,
तुमने भाई को प्यार दिया ,
वो एक उपहार है , 
लगे जैसे फूलो की बौछार है। 
 मेरी प्यारी लाडली बहाना , 
तेरी राखी लगे जैसे कोई गहना। 
एक राखी से सारा संसार बंधा है । 
उस राखी ने भाई की कलाई को सजाया , 
हर एक चहरे पर मुस्कान लाया । 
 मेरी प्यारी लाडली बहाना , 
तेरी राखी लगे जैसे कोई गहना ।  
कवि: निरु कुमार, कक्षा : 9th,
अपन घर ।  
 

 

 

 

कविता : " रक्षाबंधन "

 " रक्षाबंधन " 
 ये है रक्षाबंधन है त्योहार ,
भाई -बहन का है प्रेम ,
बहने बांधती है प्रेम के धागे,
भाई बहन को देते है हजारो का उपहार। 
ताकि जुड़ा रहे भाई बहन का प्यार ,
ये है रक्षाबंधन का त्योहार ,
हर साल बांधती है ये प्रेम के धागे। 
ताकि भाई बहन भूले न प्यार ,
ख़ुशी से , भाई - बहन मनाते है ये त्योहार ,
भाई बहन का है प्यार ,
ये है रक्षाबंधन का त्यौहार ,
ये है रक्षाबंधन का त्योहार । 
कवि: नवलेश कुमार, कक्षा: 11th,
अपना घर  

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

कविता: " मंजिल पाओगे "

 " मंजिल पाओगे "
 यूँ न बैठ उदास होकर , 
अभी जिंदगी के कई जंग बाकी है ,
एक जंग ही तो प्रविजय हुआँ है। 
तू अगले  युद्ध की तयारी कर ,
थोड़ा मेहनत और होशियार कर ,
अबकी बार जंग जित लेंगे हम। 
जिंदगी का एक जंग 
यूँ न छोड़ अपने सपने को अधूरी , 
 यूँ भूल न अपने परिजनों को ,
हिम्मत , जूनून  और जोश है वो ,
जरा अपनी आँखो और दिमांग खोल ,
अपनी जिंदगी की कई रस्ते खेल।।
कवि: पंकज कुमार, कक्षा: 10th, 
अपना घर। 

बुधवार, 23 जुलाई 2025

कविता : "बेमान मौसम "

 "बेमान मौसम "
आज के मौसम के कुछ बदलाव है। 
बारिश है या पानी का छिड़काव है। 
खुलकर न बदल बरस रहा है. 
उमस और बड़ा रहा है। 
आज के मौसम में कुछ बदलाव है। 
बारिश है या पानी का छिड़काव है। 
बारिश है या पानी का छिड़काव है। 
कवि : गया  कुमार, कक्षा : 5th,
अपना घर। 
 

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

कविता : " आंधी के अवतार में "

"आंधी के अवतार में "
कभी धीमी - धीमी रफ़्तार में ,
तो कभी आंधी के अवतार में ,
अरे! साहिल क्या रंग - रूप है तेरा ,
कभी शीतल मधुर लय - ताल में,
 तो कभी गर्मी लू के भेश में,
अरे! पवन तू कैसा परिंदा है, 
कभी पूर्व से,
तो कभी पक्षिम से, 
क्यों टपक पड़ता है बार - बार, 
चलो माना तू है ही ऐसा, 
फिर भी सुनते जाना रे,
मेहमान तू जैसा भी हो,
पर तिथि  के हिसाब  से आना रे। 

 कवी : पिंटू कुमार, कक्षा : 10th,

अपना घर 

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

कविता : "माँ तुम्हारी याद आती है "

 "माँ तुम्हारी याद आती है "
माँ मुझे तुम्हारी याद आती है। 
थोड़ा ही सही पर बहुत सताती है। 
माँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है। 
  
कभी पढ़ते  समय मन में आती है। 
तो कभी खेलते समय मन में मुस्कुराती है। 
कभी - कभी सोते समय भी मुझे सुल्लती है। 
 माँ मुझे तुम्हारी याद आती है। 
 
इस जिंदगी के दौड़ में। 
जब परेशानी से हार  जाता हूँ ।  
तो बस तू ही मुझे समझती है। 
जब मै रोउ तो तू ही चुप करती है। 
माँ मुझे तुम्हारी याद आती है। 
कवि : गोविंदा कुमार, कक्षा : 9th,
अपना घर। 

मंगलवार, 8 जुलाई 2025

कविता : " गाँव की कुछ यादे "

" गाँव की कुछ यादे "
 सुबह की  वह रोशनी। 
मेरे घर के दरवाजे पर आती थी। 
रोशनी आकर मुझे कुछ कहती थी। 
साथ में मखमली सी हवा ,
मेरे मन को मोह लेती थी। 
परित खेत सुनहरे चमकीली 
लगती थी। 
जब सूरज की रोशनी उस पर पड़ती थी। 
टैक्टर का चलना और गाय का चिल्लाना ,
भेद - बकरियों का चरना। 
जैसे एक साथ रहना ,
यह  सब गाँव को दरसाती थी। 
कवि :  सुल्तान कुमार, कक्षा : 11th  
अपना घर। 

बुधवार, 2 जुलाई 2025

Poem: " Enjoy the now "

 " Enjoy the now " 
just smile guys 
it's a colorful sky today 
not it's very not today 
sweet air is blouring everyday 
cloudy weather is everywhere 
big drops of rain too,
coming approach to raining here 
it's a cheerful time we have here.
it's a fair and lovely the day is now 
let's come to love and like it 
neither be an Idle 
nor be lazy 
won't looks tidy like this 
what an oasam day is now!
let's come or play anyhow 
it's a rainbow in the sky 
let's come to enjoy the now.
Poet: Pintu Kumar, class: 10th, 
Apna Ghar